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mahabharat 12.266.29: पुत्र चाहे योग्य हो या अयोग्य, दुर्बल हो या स्वस्थ, माता सदैव उसका पालन-पोषण करती है। माता के अतिरिक्त अन्य कोई भी पुत्र का उचित पालन-पोषण नहीं कर सकता।॥29॥   |   mahabharat अध्याय 12.266: महर्षि गौतम और चिरकारीका उपाख्यान—दीर्घकालतक सोच-विचारकर कार्य करनेकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 266: महर्षि गौतम और चिरकारीका उपाख्यान—दीर्घकालतक सोच-विचारकर कार्य करनेकी प्रशंसा  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  12.266.29 
समर्थं वासमर्थं वा कृशं वाप्यकृशं तथा।
रक्षत्येव सुतं माता नान्य: पोष्टा विधानत:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
पुत्र चाहे योग्य हो या अयोग्य, दुर्बल हो या स्वस्थ, माता सदैव उसका पालन-पोषण करती है। माता के अतिरिक्त अन्य कोई भी पुत्र का उचित पालन-पोषण नहीं कर सकता।॥29॥
 
‘Whether the son is capable or incapable, weak or healthy, the mother always takes care of him. No one other than the mother can properly take care of a son.॥ 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)