श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 266: महर्षि गौतम और चिरकारीका उपाख्यान—दीर्घकालतक सोच-विचारकर कार्य करनेकी प्रशंसा  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  12.266.28 
पुत्रपौत्रोपपन्नोऽपि जननीं य: समाश्रित:।
अपि वर्षशतस्यान्ते स द्विहायनवच्चरेत्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य अपनी माता के संरक्षण में रहता है, वह पुत्र-पौत्रों से युक्त होकर भी सौ वर्ष की आयु में भी उसके सामने दो वर्ष के बालक के समान आचरण करता है ॥ 28॥
 
'A person who lives under the protection of his mother, despite being blessed with sons and grandsons, behaves like a two-year-old child in front of her even at the age of a hundred.॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)