Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.266.27: ‘जब तक माता जीवित है, तब तक मनुष्य कभी चिन्ताग्रस्त नहीं होता, बुढ़ापा उसे अपनी ओर नहीं खींचता। जो मनुष्य दरिद्र होने पर भी माता को पुकारता हुआ घर जाता है, वह मानो माता अन्नपूर्णा के पास जा रहा है॥ 27॥ | mahabharat अध्याय 12.266: महर्षि गौतम और चिरकारीका उपाख्यान—दीर्घकालतक सोच-विचारकर कार्य करनेकी प्रशंसा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न च शोचति नाप्येनं स्थाविर्यमपकर्षति।
श्रिया हीनोऽपि यो गेहमम्बेति प्रतिपद्यते॥ २७॥
अनुवाद
‘जब तक माता जीवित है, तब तक मनुष्य कभी चिन्ताग्रस्त नहीं होता, बुढ़ापा उसे अपनी ओर नहीं खींचता। जो मनुष्य दरिद्र होने पर भी माता को पुकारता हुआ घर जाता है, वह मानो माता अन्नपूर्णा के पास जा रहा है॥ 27॥
‘A man is never worried as long as his mother is alive, old age does not pull him towards itself. One who goes home calling his mother, even if he is poor, is as if going to Mother Annapurna.॥ 27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥