Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.266.26: माता अरणि है जो मानव शरीर रूपी अग्नि को प्रकट करती है। माँ ही संसार के समस्त प्राणियों को सुख और सान्त्वना प्रदान करती है। जब तक माँ जीवित रहती है, मनुष्य अपने को अनाथ समझता है और उसके अभाव में वह अनाथ हो जाता है।' 26॥ | mahabharat अध्याय 12.266: महर्षि गौतम और चिरकारीका उपाख्यान—दीर्घकालतक सोच-विचारकर कार्य करनेकी प्रशंसा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
माता देहारणि: पुंसां सर्वस्यार्तस्य निर्वृति:।
मातृलाभे सनाथत्वमनाथत्वं विपर्यये॥ २६॥
अनुवाद
माता अरणि है जो मानव शरीर रूपी अग्नि को प्रकट करती है। माँ ही संसार के समस्त प्राणियों को सुख और सान्त्वना प्रदान करती है। जब तक माँ जीवित रहती है, मनुष्य अपने को अनाथ समझता है और उसके अभाव में वह अनाथ हो जाता है।' 26॥
‘Mother is Arani who manifests the fire in the form of human body. Mother is the one who provides happiness and solace to all the living beings in the world. As long as the mother is alive, a man considers himself an orphan and in her absence, he becomes an orphan. 26॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥