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mahabharat 12.266.24: मैंने सोचा है कि पुत्र को अपने पिता के प्रति कितना आदर रखना चाहिए। विचार करने पर यह स्पष्ट हो गया कि पिता पुत्र के लिए कोई छोटा सहारा नहीं है। अब मैं माता के विषय में सोचता हूँ।॥24॥   |   mahabharat अध्याय 12.266: महर्षि गौतम और चिरकारीका उपाख्यान—दीर्घकालतक सोच-विचारकर कार्य करनेकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.266.24 
एतद् विचिन्तितं तावत् पुत्रस्य पितृगौरवम्।
पिता नाल्पतरं स्थानं चिन्तयिष्यामि मातरम्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
मैंने सोचा है कि पुत्र को अपने पिता के प्रति कितना आदर रखना चाहिए। विचार करने पर यह स्पष्ट हो गया कि पिता पुत्र के लिए कोई छोटा सहारा नहीं है। अब मैं माता के विषय में सोचता हूँ।॥24॥
 
‘I have thought about how much respect a son should have for his father. After thinking about it, it became clear that a father is not a small support for a son. Now I think about the mother.॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)