श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 266: महर्षि गौतम और चिरकारीका उपाख्यान—दीर्घकालतक सोच-विचारकर कार्य करनेकी प्रशंसा  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  12.266.20 
भोग्ये भोज्ये प्रवचने सर्वलोकनिदर्शने।
भर्त्रा चैव समायोगे सीमन्तोन्नयने तथा॥ २०॥
 
 
अनुवाद
पिता पुत्र को वस्त्र, भोजन, प्रवचन (वेदों का अध्ययन), लोक व्यवहार की शिक्षा तथा गर्भाधान, पुंसवन और सीमन्तोन्नयन आदि समस्त संस्कारों को सम्पन्न कराने में स्वामी है॥ 20॥
 
‘The father is the lord in providing the son with clothes, food, discourses (study of the Vedas), education in social behaviour, and in performing all the rituals such as garbhadhan, punsavan and seemantonnayana, etc.॥ 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)