श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 266: महर्षि गौतम और चिरकारीका उपाख्यान—दीर्घकालतक सोच-विचारकर कार्य करनेकी प्रशंसा  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  12.266.14 
पिता ह्यात्मानमाधत्ते जायायां जज्ञिवानिति।
शीलचारित्रगोत्रस्य धारणार्थं कुलस्य च॥ १४॥
 
 
अनुवाद
अपने शील, सदाचार, कुल और वंश की रक्षा के लिए पिता स्वयं ही स्त्री के गर्भ में आकर पुत्र रूप में जन्म लेता है ॥14॥
 
'For the protection of his modesty, morality, clan and clan, the father himself puts himself in the womb of a woman and is born in the form of a son. 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)