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छिन्नस्थूणं वृषं दृष्ट्वा विलापं च गवां भृशम्।
गोग्रहे यज्ञवाटस्य प्रेक्षमाण: स पार्थिव:॥ २॥
अनुवाद
एक बार राजा ने एक यज्ञ-वेदी में देखा कि एक बैल की गर्दन कटी हुई है और बहुत सी गायें पीड़ा से कराह रही हैं। यज्ञ-वेदी के आँगन में बहुत सी गायें खड़ी थीं। यह सब देखकर राजा बोले -॥2॥
Once the king saw in a sacrificial altar that the neck of a bull was cut and many cows were crying in pain. Many cows were standing in the courtyard of the sacrificial altar. Seeing all this the king said -॥2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥