Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.265.2: एक बार राजा ने एक यज्ञ-वेदी में देखा कि एक बैल की गर्दन कटी हुई है और बहुत सी गायें पीड़ा से कराह रही हैं। यज्ञ-वेदी के आँगन में बहुत सी गायें खड़ी थीं। यह सब देखकर राजा बोले -॥2॥   |   mahabharat अध्याय 12.265: राजा विचख्नुके द्वारा अहिंसा-धर्मकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 265: राजा विचख्नुके द्वारा अहिंसा-धर्मकी प्रशंसा  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.265.2 
छिन्नस्थूणं वृषं दृष्ट्वा विलापं च गवां भृशम्।
गोग्रहे यज्ञवाटस्य प्रेक्षमाण: स पार्थिव:॥ २॥
 
 
अनुवाद
एक बार राजा ने एक यज्ञ-वेदी में देखा कि एक बैल की गर्दन कटी हुई है और बहुत सी गायें पीड़ा से कराह रही हैं। यज्ञ-वेदी के आँगन में बहुत सी गायें खड़ी थीं। यह सब देखकर राजा बोले -॥2॥
 
Once the king saw in a sacrificial altar that the neck of a bull was cut and many cows were crying in pain. Many cows were standing in the courtyard of the sacrificial altar. Seeing all this the king said -॥2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)