श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 264: जाजलिको पक्षियोंका उपदेश  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.264.2 
एते शकुन्ता बहव: समन्ताद् विचरन्ति ह।
तवोत्तमाङ्गे सम्भूता: श्येनाश्चान्याश्च जातय:॥ २॥
 
 
अनुवाद
देखो! आकाश में कितने ही बाज आदि पक्षी विचरण कर रहे हैं, उनमें तुम्हारे सिर पर उत्पन्न हुए पक्षी भी हैं॥2॥
 
Look! There are so many hawks and other birds roaming around in the sky, among them are the birds born on your head.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)