vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 12: शान्ति पर्व
»
अध्याय 264: जाजलिको पक्षियोंका उपदेश
»
श्लोक 2
श्लोक
12.264.2
एते शकुन्ता बहव: समन्ताद् विचरन्ति ह।
तवोत्तमाङ्गे सम्भूता: श्येनाश्चान्याश्च जातय:॥ २॥
अनुवाद
देखो! आकाश में कितने ही बाज आदि पक्षी विचरण कर रहे हैं, उनमें तुम्हारे सिर पर उत्पन्न हुए पक्षी भी हैं॥2॥
Look! There are so many hawks and other birds roaming around in the sky, among them are the birds born on your head.॥ 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×