Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.263.4: तुलाधार ने कहा- जाजले! मैं तुम्हें हिंसा के अतिरिक्त एक अन्य आजीविका बताऊँगा। ब्राह्मणदेव! मैं नास्तिक नहीं हूँ और न यज्ञ की निंदा करता हूँ; किन्तु यज्ञ के वास्तविक स्वरूप को समझने वाला मनुष्य अत्यंत दुर्लभ है॥4॥ | mahabharat अध्याय 12.263: जाजलिको तुलाधारका आत्मयज्ञविषयक धर्मका उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तुलाधार उवाच
वक्ष्यामि जाजले वृत्तिं नास्मि ब्राह्मण नास्तिक:।
न यज्ञं च विनिन्दामि यज्ञवित् तु सुदुर्लभ:॥ ४॥
अनुवाद
तुलाधार ने कहा- जाजले! मैं तुम्हें हिंसा के अतिरिक्त एक अन्य आजीविका बताऊँगा। ब्राह्मणदेव! मैं नास्तिक नहीं हूँ और न यज्ञ की निंदा करता हूँ; किन्तु यज्ञ के वास्तविक स्वरूप को समझने वाला मनुष्य अत्यंत दुर्लभ है॥4॥
Tuladhar said – Jajle! I will tell you a livelihood other than violence. Brahmindev! I am not an atheist nor do I condemn Yagya; But a person who understands the true nature of Yagya is very rare. 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥