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mahabharat 12.263.32: जैसे ही बुद्धिमान् ऋषिगण ऐसा चाहते हैं, बैल स्वयं ही गाड़ी में जुत जाते हैं और अपनी मानसिक शक्ति के अनुसार यात्रियों को ले जाते हैं। दुधारू गौएँ स्वयं ही दूध देती हैं, जो समस्त कामनाओं की पूर्ति करने वाला है ॥32॥   |   mahabharat अध्याय 12.263: जाजलिको तुलाधारका आत्मयज्ञविषयक धर्मका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 263: जाजलिको तुलाधारका आत्मयज्ञविषयक धर्मका उपदेश  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  12.263.32 
स्वयं चैषामनडुहो युज्यन्ति च वहन्ति च।
स्वयमुस्राश्च दुह्यन्ते मन:संकल्पसिद्धिभि:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
जैसे ही बुद्धिमान् ऋषिगण ऐसा चाहते हैं, बैल स्वयं ही गाड़ी में जुत जाते हैं और अपनी मानसिक शक्ति के अनुसार यात्रियों को ले जाते हैं। दुधारू गौएँ स्वयं ही दूध देती हैं, जो समस्त कामनाओं की पूर्ति करने वाला है ॥32॥
 
As soon as the wise sages wish to do so, the bulls themselves are harnessed to the cart and carry their passengers as per the powers of their mental resolve. The milch cows themselves provide milk, which is the fulfilment of all wishes. ॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)