Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.263.3: उन्हीं के द्वारा यज्ञ सम्पन्न होता है। तुम तो नास्तिकता की भी बात करते हो। यदि पशुओं के कष्ट को देखते हुए खेती आदि का त्याग कर दिया जाए, तो इस संसार का जीवन ही समाप्त हो जाएगा। 3॥ | mahabharat अध्याय 12.263: जाजलिको तुलाधारका आत्मयज्ञविषयक धर्मका उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ततो यज्ञ: प्रभवति नास्तिक्यमपि जल्पसि।
न हि वर्तेदयं लोको वार्तामुत्सृज्य केवलाम्॥ ३॥
अनुवाद
उन्हीं के द्वारा यज्ञ सम्पन्न होता है। तुम तो नास्तिकता की भी बात करते हो। यदि पशुओं के कष्ट को देखते हुए खेती आदि का त्याग कर दिया जाए, तो इस संसार का जीवन ही समाप्त हो जाएगा। 3॥
It is through them that the Yagya is accomplished. You even talk about atheism. If farming etc. are abandoned considering the suffering of animals, then the life of this world will end. 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥