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mahabharat 12.263.20-21h: ब्रह्म सर्वव्यापी हैं, सभी देवता उनके ही रूप हैं, वे ब्रह्म को जानने वाले ब्रह्म के भीतर निवास करते हैं। इसलिए हे जाजले! जब वे संतुष्ट होते हैं, तो सभी देवता संतुष्ट हो जाते हैं। ॥20 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.263: जाजलिको तुलाधारका आत्मयज्ञविषयक धर्मका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 263: जाजलिको तुलाधारका आत्मयज्ञविषयक धर्मका उपदेश  »  श्लोक 20-21h
 
 
श्लोक  12.263.20-21h 
अखिलं दैवतं सर्वं ब्रह्म ब्रह्मणि संश्रितम्॥ २०॥
तुष्यन्ति तृप्यतो देवास्तृप्तास्तृप्तस्य जाजले।
 
 
अनुवाद
ब्रह्म सर्वव्यापी हैं, सभी देवता उनके ही रूप हैं, वे ब्रह्म को जानने वाले ब्रह्म के भीतर निवास करते हैं। इसलिए हे जाजले! जब वे संतुष्ट होते हैं, तो सभी देवता संतुष्ट हो जाते हैं। ॥20 1/2॥
 
Brahma is the all-pervading being, all the gods are His forms, He resides within the Brahman who knows Brahman. Therefore, O Jaajale! When He is satisfied, all the gods are satisfied. ॥ 20 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)