Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.263.11-12h: जैसे आकाश से शुद्ध जल बरसता है, उसी प्रकार शुद्ध भाव से किया गया यज्ञ सुयोग्य व्यक्तियों को उत्पन्न करता है। विप्रवर! अग्नि में दी गई आहुति सूर्यमण्डल तक पहुँचती है, सूर्य से जल बरसता है, वर्षा से अन्न उत्पन्न होता है और अन्न से ही समस्त प्रजा जन्म और जीवन प्राप्त करती है। 11 1/2॥ | mahabharat अध्याय 12.263: जाजलिको तुलाधारका आत्मयज्ञविषयक धर्मका उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जैसे आकाश से शुद्ध जल बरसता है, उसी प्रकार शुद्ध भाव से किया गया यज्ञ सुयोग्य व्यक्तियों को उत्पन्न करता है। विप्रवर! अग्नि में दी गई आहुति सूर्यमण्डल तक पहुँचती है, सूर्य से जल बरसता है, वर्षा से अन्न उत्पन्न होता है और अन्न से ही समस्त प्रजा जन्म और जीवन प्राप्त करती है। 11 1/2॥
Just as pure water rains from the sky, similarly a Yagya performed with pure intentions produces worthy people. Vipravara! The offerings made in the fire reach the solar system, water rains from the sun, food grows from the rain and all the people take birth and life from the food. 11 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥