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mahabharat 12.262.7: मैंने यह घर दूसरों द्वारा काटी गई लकड़ी और घास से बनाया है। मैं दूसरों से अलक्तक (एक विशेष वृक्ष की छाल), पद्मक (कमल), तुंगकाष्ठ (लकड़ी), चंदन, सुगंधित पदार्थ और अन्य छोटी-बड़ी वस्तुएँ खरीदता और बेचता हूँ। 7.   |   mahabharat अध्याय 12.262: जाजलि और तुलाधारका धर्मके विषयमें संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 262: जाजलि और तुलाधारका धर्मके विषयमें संवाद  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  12.262.7 
परच्छिन्नै: काष्ठतृणैर्मयेदं शरणं कृतम्।
अलक्तं पद्मकं तुङ्गं गन्धांश्चोच्चावचांस्तथा॥ ७॥
 
 
अनुवाद
मैंने यह घर दूसरों द्वारा काटी गई लकड़ी और घास से बनाया है। मैं दूसरों से अलक्तक (एक विशेष वृक्ष की छाल), पद्मक (कमल), तुंगकाष्ठ (लकड़ी), चंदन, सुगंधित पदार्थ और अन्य छोटी-बड़ी वस्तुएँ खरीदता और बेचता हूँ। 7.
 
I have built this house from wood and hay cut by others. I buy and sell Alaktaka (bark of a special tree), Padmaka (lotus), Tungkastha (wood), sandalwood, aromatic substances and other small and big items from others. 7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)