Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.262.55: यह अत्यन्त उचित बात है। तपस्वी भी इसका पालन करते हैं और पुण्यात्मा पुरुष भी विचार करके सदैव इसी धर्म का पालन करते हैं ॥ 55॥ | mahabharat अध्याय 12.262: जाजलि और तुलाधारका धर्मके विषयमें संवाद । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उपपत्त्या हि सम्पन्नो यतिभिश्चैव सेव्यते।
सततं धर्मशीलैश्च निपुणेनोपलक्षित:॥ ५५॥
अनुवाद
यह अत्यन्त उचित बात है। तपस्वी भी इसका पालन करते हैं और पुण्यात्मा पुरुष भी विचार करके सदैव इसी धर्म का पालन करते हैं ॥ 55॥
This is the most reasonable thing. Even ascetics follow this and virtuous people, after giving due thought, always follow this religion. ॥ 55॥
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि तुलाधारजाजलिसंवादे द्विषष्टॺधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २६२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें तुलाधार और जाजलिका संवादविषयक दो सौ बासठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २६२॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठका १/२ श्लोक मिलाकर कुल ५५ १/२ श्लोक हैं)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥