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mahabharat 12.262.47: श्रुति में गायों को अघात करने योग्य बताया गया है, फिर उन्हें मारने का विचार कौन करेगा? जो मनुष्य गाय और बैलों को मारता है, वह महान पाप करता है ॥47॥   |   mahabharat अध्याय 12.262: जाजलि और तुलाधारका धर्मके विषयमें संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 262: जाजलि और तुलाधारका धर्मके विषयमें संवाद  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  12.262.47 
अघ्न्या इति गवां नाम क एता हन्तुमर्हति।
महच्चकाराकुशलं वृषं गां वाऽऽलभेत् तु य:॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
श्रुति में गायों को अघात करने योग्य बताया गया है, फिर उन्हें मारने का विचार कौन करेगा? जो मनुष्य गाय और बैलों को मारता है, वह महान पाप करता है ॥47॥
 
Cows have been declared as unkillable in Shruti, then who would think of killing them? The man who kills cows and bulls commits a great sin. ॥ 47॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)