Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.262.45: मेरा मानना है कि भ्रूण-हत्या जैसे क्रूर कर्म से बड़ा कोई पाप नहीं है। कुछ लोग कृषि को अच्छा मानते हैं, परन्तु वह व्यवसाय भी बहुत कठोर है ॥ 45॥ | mahabharat अध्याय 12.262: जाजलि और तुलाधारका धर्मके विषयमें संवाद । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न मन्ये भ्रूणहत्यापि विशिष्टा तेन कर्मणा।
कृषिं साध्विति मन्यन्ते सा च वृत्ति: सुदारुणा॥ ४५॥
अनुवाद
मेरा मानना है कि भ्रूण-हत्या जैसे क्रूर कर्म से बड़ा कोई पाप नहीं है। कुछ लोग कृषि को अच्छा मानते हैं, परन्तु वह व्यवसाय भी बहुत कठोर है ॥ 45॥
I believe that there is no greater sin than that cruel act of killing an embryo. Some people consider agriculture to be good, but that profession is also very harsh. ॥ 45॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥