श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 262: जाजलि और तुलाधारका धर्मके विषयमें संवाद  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  12.262.45 
न मन्ये भ्रूणहत्यापि विशिष्टा तेन कर्मणा।
कृषिं साध्विति मन्यन्ते सा च वृत्ति: सुदारुणा॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
मेरा मानना ​​है कि भ्रूण-हत्या जैसे क्रूर कर्म से बड़ा कोई पाप नहीं है। कुछ लोग कृषि को अच्छा मानते हैं, परन्तु वह व्यवसाय भी बहुत कठोर है ॥ 45॥
 
I believe that there is no greater sin than that cruel act of killing an embryo. Some people consider agriculture to be good, but that profession is also very harsh. ॥ 45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)