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mahabharat 12.262.41-42h: बकरा अग्नि का रूप है, भेड़ वरुण का रूप है, घोड़ा सूर्य का रूप है और पृथ्वी विराट का रूप है। गाय और बछड़ा चंद्रमा के रूप हैं। इन्हें बेचने से कल्याण नहीं होता ॥41 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.262: जाजलि और तुलाधारका धर्मके विषयमें संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 262: जाजलि और तुलाधारका धर्मके विषयमें संवाद  »  श्लोक 41-42h
 
 
श्लोक  12.262.41-42h 
अजोऽग्निर्वरुणो मेष: सूर्योऽश्व: पृथिवी विराट्॥ ४१॥
धेनुर्वत्सश्च सोमो वै विक्रीयैतन्न सिध्यति।
 
 
अनुवाद
बकरा अग्नि का रूप है, भेड़ वरुण का रूप है, घोड़ा सूर्य का रूप है और पृथ्वी विराट का रूप है। गाय और बछड़ा चंद्रमा के रूप हैं। इन्हें बेचने से कल्याण नहीं होता ॥41 1/2॥
 
The goat is the form of Agni, the sheep is the form of Varuna, the horse is the form of Surya and the earth is the form of Virat. The cow and the calf are the form of the moon. Selling them does not lead to welfare. ॥ 41 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)