Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.262.36: धर्म का स्वरूप अत्यन्त सूक्ष्म होने के कारण इसे हर कोई नहीं समझ सकता; क्योंकि इसके स्वरूप को छिपाने वाली अनेक बातें हैं। विभिन्न सत्पुरुषों के आचरण का अवलोकन करके मनुष्य को वास्तविक धर्म का ज्ञान प्राप्त होता है। 36. | mahabharat अध्याय 12.262: जाजलि और तुलाधारका धर्मके विषयमें संवाद । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सूक्ष्मत्वान्न स विज्ञातुं शक्यते बहुनिह्नव:।
उपलभ्यान्तरा चान्यानाचारानवबुध्यते॥ ३६॥
अनुवाद
धर्म का स्वरूप अत्यन्त सूक्ष्म होने के कारण इसे हर कोई नहीं समझ सकता; क्योंकि इसके स्वरूप को छिपाने वाली अनेक बातें हैं। विभिन्न सत्पुरुषों के आचरण का अवलोकन करके मनुष्य को वास्तविक धर्म का ज्ञान प्राप्त होता है। 36.
Because the nature of religion is very subtle, it cannot be understood by everyone; because there are many things that hide its nature. By observing the behavior of various good men, man gains the knowledge of the real religion. 36.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥