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mahabharat 12.262.33: प्राणियों की रक्षा करना सब दानों में श्रेष्ठ कहा गया है। हे जाजले! मैं तुमसे सत्य कहता हूँ, मेरी बात मानो।॥33॥   |   mahabharat अध्याय 12.262: जाजलि और तुलाधारका धर्मके विषयमें संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 262: जाजलि और तुलाधारका धर्मके विषयमें संवाद  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  12.262.33 
दानं भूताभयस्याहु: सर्वदानेभ्य उत्तमम्।
ब्रवीमि ते सत्यमिदं श्रद्दधस्व च जाजले॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
प्राणियों की रक्षा करना सब दानों में श्रेष्ठ कहा गया है। हे जाजले! मैं तुमसे सत्य कहता हूँ, मेरी बात मानो।॥33॥
 
Giving protection to creatures is said to be the best of all gifts. O Jajale! I am telling you the truth, believe me. ॥ 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)