Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.262.31: जिससे सब लोग डरते हैं, वह घर में रहने वाले साँप के समान है, वह इस लोक में या परलोक में कभी धर्म का फल नहीं पाता ॥31॥   |   mahabharat अध्याय 12.262: जाजलि और तुलाधारका धर्मके विषयमें संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 262: जाजलि और तुलाधारका धर्मके विषयमें संवाद  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  12.262.31 
यस्मादुद्विजते लोक: सर्पाद् वेश्मगतादिव।
न स धर्ममवाप्नोति इहलोके परत्र च॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
जिससे सब लोग डरते हैं, वह घर में रहने वाले साँप के समान है, वह इस लोक में या परलोक में कभी धर्म का फल नहीं पाता ॥31॥
 
The person who is feared by everyone is like a snake living inside a house, never reaps the fruits of Dharma either in this world or the next. ॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)