श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 262: जाजलि और तुलाधारका धर्मके विषयमें संवाद  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.262.3 
अध्यगा नैष्ठिकीं बुद्धिं कुतस्त्वामिदमागतम्।
एतदाचक्ष्व मे सर्वं निखिलेन महामते॥ ३॥
 
 
अनुवाद
महामते! आपको धर्म में तत्पर रहने की बुद्धि कहाँ से मिली? यह ज्ञान आपको कैसे प्राप्त हुआ? यह सब विस्तारपूर्वक मुझसे कहिए॥3॥
 
Mahamate! From where did you get this wisdom to be devoted to religion? How did you acquire this knowledge? Tell me all this in detail.॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)