श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 262: जाजलि और तुलाधारका धर्मके विषयमें संवाद  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  12.262.29 
लोके य: सर्वभूतेभ्यो ददात्यभयदक्षिणाम्।
स सर्वयज्ञैरीजान: प्राप्नोत्यभयदक्षिणाम्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
जो संसार के समस्त प्राणियों को अभय दक्षिणा देता है, उसने मानो समस्त यज्ञ कर लिए हैं और वह भी सब ओर से अभय दान प्राप्त कर लेता है ॥29॥
 
He who gives dakshina of fearlessness to all living beings in the world, it is as if he has performed all the yagnas and he too receives the gift of fearlessness from all sides. ॥ 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)