Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.262.21: जो विद्वान् पुरुष मन में दूसरों के प्रति द्वेष न रखकर इस प्रकार महापुरुषों के आचरण को आचरण में लाता है, वह विद्वान् वेदों से प्रकाशित सदाचार का पालन करके शीघ्र ही धर्म के रहस्य को जान लेता है। 21॥ | mahabharat अध्याय 12.262: जाजलि और तुलाधारका धर्मके विषयमें संवाद । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आचाराज्जाजले प्राज्ञ: क्षिप्रं धर्ममवाप्नुयात्।
एवं य: साधुभिर्दान्तश्चरेदद्रोहचेतसा॥ २१॥
अनुवाद
जो विद्वान् पुरुष मन में दूसरों के प्रति द्वेष न रखकर इस प्रकार महापुरुषों के आचरण को आचरण में लाता है, वह विद्वान् वेदों से प्रकाशित सदाचार का पालन करके शीघ्र ही धर्म के रहस्य को जान लेता है। 21॥
Jaazle! The learned man who, without harboring hatred towards others in his mind, thus brings into practice the conduct followed by great men, that scholar, by following the virtuous conduct enlightened by the Vedas, soon learns the secret of religion. 21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥