श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 262: जाजलि और तुलाधारका धर्मके विषयमें संवाद  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  12.262.17 
न भूतो न भविष्योऽस्ति न च धर्मोऽस्ति कश्चन।
योऽभय: सर्वभूतानां स प्राप्नोत्यभयं पदम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
जिसे भूतकाल या भविष्यकाल में कोई कर्म नहीं करना है, और जिसका कोई कर्तव्य शेष नहीं रह गया है तथा जो समस्त प्राणियों की रक्षा करता है, वही अभय पद को प्राप्त होता है ॥17॥
 
He who has no work to do in the past or future and who has no duty left to perform and who also provides protection to all beings, he alone attains the state of being fearless. ॥17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)