श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 262: जाजलि और तुलाधारका धर्मके विषयमें संवाद  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  12.262.16 
यदा न कुरुते भावं सर्वभूतेषु पापकम्।
कर्मणा मनसा वाचा ब्रह्म सम्पद्यते तदा॥ १६॥
 
 
अनुवाद
जब मनुष्य मन, वाणी और कर्म से भी समस्त प्राणियों के प्रति कोई नकारात्मक भावना नहीं रखता, तब वह ब्रह्मभाव (ब्रह्म की स्थिति) को प्राप्त होता है।॥16॥
 
When one does not have any negative feelings towards all creatures even in thought, speech or action, then one achieves Brahmabhaav (the state of Brahma).॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)