Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.262.13: जैसे देवताओं द्वारा सदा के लिए बंद कर दिए गए अंधे, बहरे और पागल मनुष्य केवल श्वास लेते रहते हैं, वही मुझ द्रष्टा के लिए भी उपमा है (अर्थात् मैं देखकर भी नहीं देखता, सुनकर भी नहीं सुनता और विषयों में मन नहीं लगाता; केवल साक्षीभाव से देखता हूँ और केवल श्वास-प्रश्वास की क्रिया करता रहता हूँ)।॥13॥ | mahabharat अध्याय 12.262: जाजलि और तुलाधारका धर्मके विषयमें संवाद । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जैसे देवताओं द्वारा सदा के लिए बंद कर दिए गए अंधे, बहरे और पागल मनुष्य केवल श्वास लेते रहते हैं, वही मुझ द्रष्टा के लिए भी उपमा है (अर्थात् मैं देखकर भी नहीं देखता, सुनकर भी नहीं सुनता और विषयों में मन नहीं लगाता; केवल साक्षीभाव से देखता हूँ और केवल श्वास-प्रश्वास की क्रिया करता रहता हूँ)।॥13॥
Just as the blind, deaf and insane men, whose eyes, ears etc. have been closed forever by the gods, keep on breathing only, the same is the analogy for me, the seer (i.e. I do not see even after seeing, I do not hear even after hearing and I do not direct my mind towards the objects; I only watch as a witness and keep on doing the activity of breathing and exhaling only).॥ 13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥