हे ब्राह्मण! मैं आकाश के समान निर्लिप्त रहता हूँ और संसार के कार्यों की विचित्रता को देखता हुआ, न तो दूसरों के कार्यों की प्रशंसा करता हूँ और न ही उनकी निन्दा करता हूँ ॥ 11॥
O Brahmin! I remain detached like the sky and observing the strangeness of the activities of the world, I neither praise nor criticise the activities of others. ॥ 11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥