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mahabharat 12.262.10: मैं न किसी से प्रार्थना करता हूँ, न किसी का विरोध करता हूँ, न किसी से द्वेष करता हूँ, न किसी से कुछ चाहता हूँ। सब प्राणियों के प्रति मेरा आदर समान है। हे जाजले! यही मेरा व्रत और नियम है, इसे देखो। मुनि! मेरा तराजू सब मनुष्यों के लिए समान है - यह सबका समान रूप से तौलता है॥10॥   |   mahabharat अध्याय 12.262: जाजलि और तुलाधारका धर्मके विषयमें संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 262: जाजलि और तुलाधारका धर्मके विषयमें संवाद  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  12.262.10 
नानुरुद्धॺे निरुध्ये वा न द्वेष्मि न च कामये।
समोऽहं सर्वभूतेषु पश्य मे जाजले व्रतम्।
तुला मे सर्वभूतेषु समा तिष्ठति जाजले॥ १०॥
 
 
अनुवाद
मैं न किसी से प्रार्थना करता हूँ, न किसी का विरोध करता हूँ, न किसी से द्वेष करता हूँ, न किसी से कुछ चाहता हूँ। सब प्राणियों के प्रति मेरा आदर समान है। हे जाजले! यही मेरा व्रत और नियम है, इसे देखो। मुनि! मेरा तराजू सब मनुष्यों के लिए समान है - यह सबका समान रूप से तौलता है॥10॥
 
I neither request nor oppose anyone, nor do I hate anyone, nor do I desire anything from anyone. I have equal respect for all creatures. O Jajale! This is my vow and rule, look at it. Muni! My scale is equal for all men - it weighs equally for everyone.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)