श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 262: जाजलि और तुलाधारका धर्मके विषयमें संवाद  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.262.1 
भीष्म उवाच
इत्युक्त: स तदा तेन तुलाधारेण धीमता।
प्रोवाच वचनं धीमान् जाजलिर्जपतां वर:॥ १॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी कहते हैं - राजन्! उस समय जब बुद्धिमान तुलाधारी ने ऐसा कहा, तब मन्त्रियों में श्रेष्ठ जाजला ने ऐसा कहा॥1॥
 
Bhishmaji says – King! At that time, when the intelligent Libra holder said this, Jajala, the best among the chanters, said this. 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)