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श्लोक 12.261.6  |
न मया सदृशोऽस्तीह लोके स्थावरजङ्गमे।
अप्सु वैहायसं गच्छेन्मया योऽन्य: सहेति वै॥ ६॥ |
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| अनुवाद |
| मेरे सिवा इस संसार में कोई दूसरा मनुष्य नहीं है जो मेरे साथ जल में चलने और आकाश में विचरण करने की शक्ति रखता हो ॥6॥ |
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| Apart from me there is no other human being in this world who has the power to move along with me in water and roam in the sky. ॥ 6॥ |
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