Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.261.50: हे ब्रह्मन्! जब उनके पंख बड़े हो गए और वे भोजन करने के लिए इधर-उधर उड़ने लगे, तब तुम उन पक्षियों के पालन से मिलने वाले पुण्य को बहुत महान समझने लगे ॥50॥ | mahabharat अध्याय 12.261: जाजलिकी घोर तपस्या, सिरपर जटाओंमें पक्षियोंके घोंसला बनानेसे उनका अभिमान और आकाशवाणीकी प्रेरणासे उनका तुलाधार वैश्यके पास जाना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जातपक्षा यदा ते च गताश्चारीमितस्तत:।
मन्यमानस्ततो धर्मं चटकप्रभवं द्विज॥ ५०॥
अनुवाद
हे ब्रह्मन्! जब उनके पंख बड़े हो गए और वे भोजन करने के लिए इधर-उधर उड़ने लगे, तब तुम उन पक्षियों के पालन से मिलने वाले पुण्य को बहुत महान समझने लगे ॥50॥
O Brahman! When their wings grew and they flew here and there to eat food, then you started considering the virtue derived from rearing those birds to be very great. ॥ 50॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥