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mahabharat 12.261.49: हे श्रेष्ठ ब्राह्मण! जब आपने तपस्या द्वारा सिद्धि प्राप्त की, तो पक्षियों ने शीघ्र ही आपके सिर पर अंडे दे दिए और उनसे बच्चे उत्पन्न हुए। आपने उन सबकी बहुत अच्छी तरह रक्षा की।   |   mahabharat अध्याय 12.261: जाजलिकी घोर तपस्या, सिरपर जटाओंमें पक्षियोंके घोंसला बनानेसे उनका अभिमान और आकाशवाणीकी प्रेरणासे उनका तुलाधार वैश्यके पास जाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 261: जाजलिकी घोर तपस्या, सिरपर जटाओंमें पक्षियोंके घोंसला बनानेसे उनका अभिमान और आकाशवाणीकी प्रेरणासे उनका तुलाधार वैश्यके पास जाना  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  12.261.49 
तत: सिद्धस्य तपसा तव विप्र शकुन्तका:।
क्षिप्रं शिरस्यजायन्त ते च सम्भावितास्त्वया॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
हे श्रेष्ठ ब्राह्मण! जब आपने तपस्या द्वारा सिद्धि प्राप्त की, तो पक्षियों ने शीघ्र ही आपके सिर पर अंडे दे दिए और उनसे बच्चे उत्पन्न हुए। आपने उन सबकी बहुत अच्छी तरह रक्षा की।
 
O great Brahmin! When you attained perfection through austerity, the birds soon laid eggs on your head and babies were born from them. You protected them all very well.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)