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स नद्यां समुपस्पृश्य तर्पयित्वा हुताशनम्।
उदयन्तमथादित्यमुपातिष्ठन्महातपा: ॥ ४०॥
अनुवाद
तब महातपस्वी ऋषि ने नदी के तट पर जाकर स्नान किया और संध्यावंदन करने के बाद अग्निहोत्र करके अग्निदेव को संतुष्ट किया और फिर उगते हुए सूर्य की पूजा की।
Then the great ascetic sage went to the bank of the river and took a bath, and after performing the evening oblations, he satisfied the god of fire by performing Agnihotra and then worshipped the rising Sun.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥