Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.261.33: किसी समय उनके माता-पिता उन्हें छोड़कर उड़ गए। अब बच्चे आते-जाते, फिर जाते और फिर वापस आ जाते। इस तरह वे आते-जाते रहे। तब तक ऋषि जाजलि ने कोई हलचल नहीं की। | mahabharat अध्याय 12.261: जाजलिकी घोर तपस्या, सिरपर जटाओंमें पक्षियोंके घोंसला बनानेसे उनका अभिमान और आकाशवाणीकी प्रेरणासे उनका तुलाधार वैश्यके पास जाना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कदाचित् पुनरभ्येत्य पुनर्गच्छन्ति संततम्।
त्यक्ता मातापितृभ्यां ते न चाकम्पत जाजलि:॥ ३३॥
अनुवाद
किसी समय उनके माता-पिता उन्हें छोड़कर उड़ गए। अब बच्चे आते-जाते, फिर जाते और फिर वापस आ जाते। इस तरह वे आते-जाते रहे। तब तक ऋषि जाजलि ने कोई हलचल नहीं की।
At some point of time, their parents left them and flew away. Now the children would come and go and then go and come back again. In this way, they kept coming and going. Till then, sage Jajali did not move.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥