Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.261.3: वे नियमों से रहते थे, संयमित भोजन करते थे, छाल, मृगचर्म और जटाधारी वस्त्र पहनते थे। वे बुद्धिमान ऋषि कई वर्षों तक अपने शरीर पर मिट्टी और कीचड़ लगाकर खड़े रहे। | mahabharat अध्याय 12.261: जाजलिकी घोर तपस्या, सिरपर जटाओंमें पक्षियोंके घोंसला बनानेसे उनका अभिमान और आकाशवाणीकी प्रेरणासे उनका तुलाधार वैश्यके पास जाना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वे नियमों से रहते थे, संयमित भोजन करते थे, छाल, मृगचर्म और जटाधारी वस्त्र पहनते थे। वे बुद्धिमान ऋषि कई वर्षों तक अपने शरीर पर मिट्टी और कीचड़ लगाकर खड़े रहे।
They lived according to rules, ate in a controlled manner and wore bark, deerskin and matted hair. Those wise sages stood for many years with dirt and mud on their bodies.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥