Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.261.23-24: राजन! धीरे-धीरे वर्षा ऋतु बीत गई और शरद ऋतु आ गई। उस समय काम से मोहित होकर उन चिड़ियों ने प्रजनन विधि के अनुसार आपस में समागम किया और विश्वास के कारण उन्होंने ऋषि के सिर पर अंडे दे दिए। कठोर व्रत रखने वाले उस महापुरुष ब्राह्मण को जब यह ज्ञात हुआ कि चिड़ियों ने उसकी जटाओं में अंडे दिए हैं। | mahabharat अध्याय 12.261: जाजलिकी घोर तपस्या, सिरपर जटाओंमें पक्षियोंके घोंसला बनानेसे उनका अभिमान और आकाशवाणीकी प्रेरणासे उनका तुलाधार वैश्यके पास जाना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
राजन! धीरे-धीरे वर्षा ऋतु बीत गई और शरद ऋतु आ गई। उस समय काम से मोहित होकर उन चिड़ियों ने प्रजनन विधि के अनुसार आपस में समागम किया और विश्वास के कारण उन्होंने ऋषि के सिर पर अंडे दे दिए। कठोर व्रत रखने वाले उस महापुरुष ब्राह्मण को जब यह ज्ञात हुआ कि चिड़ियों ने उसकी जटाओं में अंडे दिए हैं।
King! Gradually the rainy season passed and autumn arrived. At that time, fascinated by lust, those sparrows mated with each other as per the method of procreation and due to trust, they laid eggs on the head of the sage. That illustrious Brahmin, who was observing a strict fast, came to know that the birds had laid eggs in his matted hair.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥