Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.261.21: ऋषि बड़े दयालु थे, इसलिए जब उन्होंने उन दो पक्षियों को अपनी जटाओं में तिनकों का घोंसला बनाते देखा, तो उन्होंने उनकी ओर ध्यान नहीं दिया और उन्हें हटाने या भगाने का कोई प्रयास नहीं किया ॥21॥ | mahabharat अध्याय 12.261: जाजलिकी घोर तपस्या, सिरपर जटाओंमें पक्षियोंके घोंसला बनानेसे उनका अभिमान और आकाशवाणीकी प्रेरणासे उनका तुलाधार वैश्यके पास जाना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ऋषि बड़े दयालु थे, इसलिए जब उन्होंने उन दो पक्षियों को अपनी जटाओं में तिनकों का घोंसला बनाते देखा, तो उन्होंने उनकी ओर ध्यान नहीं दिया और उन्हें हटाने या भगाने का कोई प्रयास नहीं किया ॥21॥
The sage was very kind and so when he saw the two birds building a nest of straws in his matted hair, he ignored them and made no attempt to remove or drive them away. ॥21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥