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श्लोक 12.261.10  |
इति ब्रुवाणं तमृषिं रक्षांस्युद्धृत्य सागरात्।
अब्रुवन् गच्छ पन्थानमास्थायेमं द्विजोत्तम॥ १०॥ |
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| अनुवाद |
| ऐसा कहकर दैत्यों ने महर्षि को तटवर्ती जल से बाहर ले जाकर उनसे कहा - 'द्विजश्रेष्ठ! इस मार्ग का आश्रय लेकर काशीपुरी में जाओ॥10॥ |
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| Saying this, the demons took the great sage out of the coastal waters and said to him - 'Dwijashreshtha! Take shelter of this route and go to Kashipuri. 10॥ |
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