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mahabharat 12.261.1: भीष्मजी बोले - राजन्! प्राचीन इतिहास के विद्वान् पुरुष यहाँ तुलाधार वैश्य और जाजलि के बीच हुए धर्म विषयक वार्तालाप का उदाहरण देते हैं।   |   mahabharat अध्याय 12.261: जाजलिकी घोर तपस्या, सिरपर जटाओंमें पक्षियोंके घोंसला बनानेसे उनका अभिमान और आकाशवाणीकी प्रेरणासे उनका तुलाधार वैश्यके पास जाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 261: जाजलिकी घोर तपस्या, सिरपर जटाओंमें पक्षियोंके घोंसला बनानेसे उनका अभिमान और आकाशवाणीकी प्रेरणासे उनका तुलाधार वैश्यके पास जाना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.261.1 
भीष्म उवाच
अत्राप्युदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम्।
तुलाधारस्य वाक्यानि धर्मे जाजलिना सह॥ १॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी बोले - राजन्! प्राचीन इतिहास के विद्वान् पुरुष यहाँ तुलाधार वैश्य और जाजलि के बीच हुए धर्म विषयक वार्तालाप का उदाहरण देते हैं।
 
Bhishmaji said – King! The learned men of ancient history give an example here of the conversations that Tuladhar Vaishya had with Jajli about religion.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)