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सदाचारो मतो धर्म: सन्तस्त्वाचारलक्षणा:।
साध्यासाध्यं कथं शक्यं सदाचारो ह्यलक्षण:॥ ५॥
अनुवाद
आपके कथनानुसार, सत्पुरुषों का आचरण ही धर्म माना गया है और जो धर्म का पालन करते हैं, वही सच्चे पुरुष हैं। ऐसी स्थिति में, परस्परावलंबन के दोष के कारण, साध्य और असम्भव में भेद कैसे हो सकता है? ऐसी स्थिति में, सत्पुरुषों का आचरण धर्म का लक्षण नहीं हो सकता।
As per your saying, the conduct of good men is considered as Dharma and those who follow Dharma are the true men. In such a condition, due to the defect of interdependence, how can there be a discrimination between the achievable and the impossible? In such a condition, good conduct cannot be a sign of Dharma.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥