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इमानि हि प्राणयन्ति सृजन्त्युत्तारयन्ति च।
न धर्म: परिपाठेन शक्यो भारत वेदितुम्॥ ३॥
अनुवाद
हे भरतनन्दन! धर्म ही इन प्राणियों की उत्पत्ति का कारण है। धर्म ही इनके जीवन और मोक्ष का कारण है; किन्तु केवल वेद पढ़कर ही धर्म को नहीं जाना जा सकता।॥3॥
Bharatanandan! Dharma is the reason for the creation of these creatures. Dharma is the reason for their survival and salvation; but Dharma cannot be known merely by reading the Vedas.॥ 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥