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mahabharat 12.260.2: आपने मेरे हृदय में उठे सभी प्रश्नों का समाधान कर दिया है। महाराज! अब मैं यह दूसरा प्रश्न उठा रहा हूँ। इसका कारण जिज्ञासा है, हठ नहीं॥ 2॥   |   mahabharat अध्याय 12.260: युधिष्ठिरका धर्मकी प्रामाणिकतापर संदेह उपस्थित करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 260: युधिष्ठिरका धर्मकी प्रामाणिकतापर संदेह उपस्थित करना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.260.2 
भूयांसो हृदये ये मे प्रश्नास्ते व्याहृतास्त्वया।
इदं त्वन्यत् प्रवक्ष्यामि न राजन् निग्रहादिव॥ २॥
 
 
अनुवाद
आपने मेरे हृदय में उठे सभी प्रश्नों का समाधान कर दिया है। महाराज! अब मैं यह दूसरा प्रश्न उठा रहा हूँ। इसका कारण जिज्ञासा है, हठ नहीं॥ 2॥
 
You have resolved all the questions that arose in my heart. Maharaj! Now I am raising this second question. The reason behind this is curiosity, not obstinacy.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)