अवाप्यैतानि कर्माणि वेदोक्तानि धनंजय।
दानमध्ययनं यज्ञो निग्रहश्चैव दुर्ग्रह:॥ ८॥
दक्षिणेन च पन्थानमर्यम्णो ये दिवं गता:।
एतान् क्रियावतां लोकानुक्तवान् पूर्वमप्यहम्॥ ९॥
अनुवाद
धनंजय! दान, स्वाध्याय, यज्ञ और संयम- ये सब कर्म अत्यन्त कठिन हैं। इन वैदिक कर्मों का (इच्छा सहित) आश्रय लेकर मनुष्य सूर्य के दक्षिणायन मार्ग से स्वर्ग को जाते हैं। कर्ममार्ग का अनुसरण करने वाले इन पुरुषों के लोकों का वर्णन मैं पहले ही कर चुका हूँ। ॥8-9॥
'Dhananjaya! Charity, study, sacrifice and self-control - all these deeds are very difficult. By resorting to these Vedic deeds (with a desire), people go to heaven through the southern path of the Sun. I have already discussed the worlds of these men who follow the path of action. ॥ 8-9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)