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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 26: युधिष्ठिरके द्वारा धनके त्यागकी ही महत्ताका प्रतिपादन
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श्लोक 7
श्लोक
12.26.7
अजाश्च पृश्नयश्चैव सिकताश्चैव भारत।
अरुणा: केतवश्चैव स्वाध्यायेन दिवं गता:॥ ७॥
अनुवाद
भारत! अज, पृश्नि, सिकता, अरुण और केतु नामक ऋषियों ने स्वाध्याय के द्वारा स्वर्ग प्राप्त किया था।
'Bharat! The sages named Aja, Prishni, Sikata, Arun and Ketu had attained heaven through self-study.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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