श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 26: युधिष्ठिरके द्वारा धनके त्यागकी ही महत्ताका प्रतिपादन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  12.26.5 
स्वाध्यायनिष्ठान् हि ऋषीन् ज्ञाननिष्ठांस्तथापरान्।
बुद्धॺेथा: संततं चापि धर्मनिष्ठान् धनंजय॥ ५॥
 
 
अनुवाद
हे अर्जुन! तू सदैव यह समझ ले कि ऋषियों में कुछ लोग वेद-शास्त्रों के स्वाध्याय में लगे रहते हैं, कुछ लोग ज्ञानार्जन में लगे रहते हैं और कुछ लोग केवल धर्म के पालन में ही लगे रहते हैं॥5॥
 
'Arjuna! You should always understand that among the sages, some are devoted to self-study of the Vedas and scriptures, some are engaged in acquiring knowledge and some are devoted only to following the religion.॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)