Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.26.4: धनंजय! देवता उन्हीं ब्राह्मणों को अपना मानते हैं जो सब धर्मों को जानते हैं, ब्रह्मचर्य आश्रम में रहते हैं तथा जो ऋषियों की स्वाध्यायपरम्परा की सदैव रक्षा करते हैं। | mahabharat अध्याय 12.26: युधिष्ठिरके द्वारा धनके त्यागकी ही महत्ताका प्रतिपादन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
धनंजय! देवता उन्हीं ब्राह्मणों को अपना मानते हैं जो सब धर्मों को जानते हैं, ब्रह्मचर्य आश्रम में रहते हैं तथा जो ऋषियों की स्वाध्यायपरम्परा की सदैव रक्षा करते हैं।
'Dhananjaya! The gods consider only those Brahmins who know all the religions and are in the Brahmacharya Ashram and who always protect the tradition of self-study of the sages.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥