‘प्राप्त धन का उपयोग करते समय दो प्रकार की गलतियाँ होती हैं, जिन्हें ध्यान में रखना चाहिए। पहली गलती है, अयोग्य व्यक्ति को धन देना और दूसरी है, पात्र व्यक्ति को धन न देना।’॥31॥
‘There are two kinds of mistakes that are made while using the money that one receives, which should be kept in mind. The first mistake is giving money to an unworthy person and the second is not giving money to a deserving person.’॥ 31॥
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि युधिष्ठिरवाक्ये षड्विंशोऽध्याय:॥ २६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें युधिष्ठिरका वाक्यविषयक छब्बीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २६॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)