तस्माद्बुद्धॺन्ति पुरुषा न हि तत् कस्यचिद् ध्रुवम्।
श्रद्दधानस्ततो लोको दद्याच्चैव यजेत च॥ २७॥
अनुवाद
इसीलिए बुद्धिमान पुरुष यह समझते हैं कि धन एक व्यक्ति के पास नहीं रहता; इसलिए धर्मात्मा पुरुष को चाहिए कि वह धन दान कर दे और यज्ञों में लगा दे॥ 27॥
'That is why wise men understand that wealth never stays with one person; therefore a devout person should donate that wealth and use it in sacrifices.॥ 27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)