Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.26.27: इसीलिए बुद्धिमान पुरुष यह समझते हैं कि धन एक व्यक्ति के पास नहीं रहता; इसलिए धर्मात्मा पुरुष को चाहिए कि वह धन दान कर दे और यज्ञों में लगा दे॥ 27॥ | mahabharat अध्याय 12.26: युधिष्ठिरके द्वारा धनके त्यागकी ही महत्ताका प्रतिपादन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तस्माद्बुद्धॺन्ति पुरुषा न हि तत् कस्यचिद् ध्रुवम्।
श्रद्दधानस्ततो लोको दद्याच्चैव यजेत च॥ २७॥
अनुवाद
इसीलिए बुद्धिमान पुरुष यह समझते हैं कि धन एक व्यक्ति के पास नहीं रहता; इसलिए धर्मात्मा पुरुष को चाहिए कि वह धन दान कर दे और यज्ञों में लगा दे॥ 27॥
'That is why wise men understand that wealth never stays with one person; therefore a devout person should donate that wealth and use it in sacrifices.॥ 27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥